Saturday, July 31, 2010

क्यों कम होते हैं होम लोन डीफॉल्टर्स होम लोन लेकर अपना घर बनाने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. होम लोन के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि इसमें 30 से 35 एज ग्रुप के लोग सबसे ज्यादा हैं. यही नहीं दूसरे लोन्स की तरह इसमें डीफॉल्टर्स की संख्या भी काफी कम है. इस तरह के लोन में डीफॉल्टर्स की संख्या इतनी कम क्यों है, आइये जानते हैं.http://www.propertysansar.com

Sunday, July 18, 2010

जमीन में इनवेस्टमेंट जमीन में इनवेस्टमेंट करना लंबी अवधि में फायदे का सौदा साबित होता है. इसलिए इसमें कम से कम 5-10 साल बाद ही रिटर्न के बारे में सोचना चाहिए.जमीन कहीं भी खरीदें उससे पहले उस इलाके और जमीन की कानूनी स्थिति के बारे में जांच-पड़ताल न कर लें. यह सुरक्षा के लिहाज से सही रहता है. किसी हाउसिंग स्कीम के पास जमीन लेनी हो, तो अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि उस स्थिति में हाउसिंग full story..........http://www.propertysansar.com

Wednesday, July 14, 2010

कैसा हो आपका बेडरूम

घर के हर हिस्से का अपना अलग महत्व होता है और उसी के अनुसार उसकी सजावट पर भी ध्यान दिया जाता है. बात बेडरूम की करें तो यह घर का वो भाग कहा जाता है जहां हर कोई आराम और सुकून के साथ अच्छी नींद के लिए जाता है. अच्छी नींद के लिए जरूरी है कि घर के इस हिस्से को उसी रंग रूप में ढाला जाए जिससे कि आराम में किसी तरह का खलल न पड़े.

बेडरूम की डेकोरेशन और इसके लिए फर्नीचर प्लान करते समय सबसे पहले उसका एरिया और अपनी जरूरतों की लिस्ट बनाएं. कमरे के आकार के मुताबिक ही इसमें बेड रखें. कहीं ऐसा न हो कि आप बड़े आकार का बेड ले आएं और उसे लगाने के बाद जरूरत की दूसरी चीजें रखने के लिए यहां स्पेस ही न बचे. बेडरूम को माडर्न लुक देने के लिए बुड की बजाय आप रॉट आयरन के बेड का इस्तेमाल कर सकते हैं. आजकल यह फैशन में भी है, लेकिन फैशन के साथ आपको अपने आराम का खास ध्यान रखना भी जरूरी है. जहां तक रंगों का सवाल है तो घर के इस हिस्से के लिए हल्के रंगों का ही इस्तेमाल करें. हल्के रंग न सिर्फ आपको सुकून भरा अहसास देंगे बल्कि

इससे एक्सेसरीज की मैचिंग भी आसान रहेगी. क्रीम, लाइट ग्रीन, लाइट ब्ल्यू, ऑफ वाइट या फिर लाइट पिंक बेडरूम के लिए अच्छे माने जाते हैं. बेडरूम में कलर्स के मिक्स्ड मैच से बचने की ही कोशिश की जानी चाहिए. महानगरों में बनने वाले घरों में मास्टर बेडरूम के साथ अटैच बाथरूम का चलन भी खूब बढ़ा है. अगर आप किसी प्लाॅट पर अपना नया घर बनवा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रख सकते हैं. लगभग हर घर के बेडरूम डेªसिंग टेबल जरूर देखने को मिलती है. कई बार इसे बेड के ठीक सामने भी रख दिया जाता है, जिससे बेड पर सोने वाले का रिफलेक्शन दिखाई देता है, वास्तु के लिहाज से इसे गलत माना जाता है. सोते हुए या फिर आराम करते वक्त शरीर के सामने शीशा होने से शरीर में नेगेटिव एनर्जी बढ़ती है.

इस सबके साथ बेडरूम में यहां की लाइट अरेंजमेंट का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। अगर आपको सोने से पहले कुछ देर पढ़ने का शौक है तो इसके लिए साइड टेबल्स पर लैंप लगा सकते हैं। जहां तक पूरे कमरे की लाइट की बात है तो फोकस और कलरफुल लाइट्स की जरूरत यहां नहीं होती. बेडरूम में ऐसी रोषनी का इंतजाम करें जो हल्की हो और आंखों को न लगे. इसमें कोई षक नहीं कि बेडरूम आपकी पर्सनल लाइफ का पार्ट भी मानी जाती है इसलिए यह भी जरूरी है कि उसे बिखेर कर न रखें बल्कि उसकी सफाई और खूबसूरती पर भी पूरा ध्यान दें. अगर इस तरह आपका भी बेडरूम सजा-संवरा होगा तो निष्चित तौर पर आपका अच्छा वक्त तो यहां बीतेगा ही साथ ही भरपूर आराम मिलने में भी कोई कसर नहीं रहेगी. http://propertysansar.com

Tuesday, July 13, 2010

इन ख्रचों को भूल न जाना

इन खर्चों को भूल न जाना होम लोन लेते वक्त ज्यादा ध्यान इंटरेस्ट रेट पर ही रहता है. मगर लोन के साथ भी कुछ ऐसे खर्च जुड़े होते हैं जिन्हें कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है. बेहतर होगा डील फाइनल करने से पहले इन खर्चों पर बारीक निगाह डाल ली जाए ताक हिसाब-किताब बेहतर तरीके से बन सके. सबसे पहले बात अप्लिकेशन फीस की. यह छोटा - सा अमाउंट होता है जो लोन देने वाली कंपनियां आमतौर पर लोन अप्लिकेशन के साथ फीस चार्ज करती हैं यह आमतौर पर नॉन रिफंडेबल होता है. प्रोसेसिंग फीस पर भी गौर कर लें. इसमें डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन , क्रेडिट केपेसिटी , प्रॉपर्टी की जांच और पहले लिए गए लोन्स आदि से जुड़ी इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करने के लिए फीस चार्ज की जाती है. इस काम के लिए हर लोन कंपनी के पास लीगल एक्सपर्ट्स , फाइनैंस एक्सपर्ट्स सहित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ की पूरी टीम होती है. अप्राप्त धन पर ब्याज कितना होगा यह पता कर लें. दरअसल लोन की पूरी रकम कोई भी बैंक एक साथ नहीं देता. यह रकम किस्तों में दी जाती है. अक्सर ब्याज केवल दिए गए धन पर ही लगता है , लेकिन कुछ बैंक पूरे अमाउंट पर भी ब्याज चार्ज करते हैं. अगर आप बिना मिले धन पर ब्याज न देना चाहें , तो इस बात के बारे में बैंक से पहले ही पता कर लें. प्री - पेमेंट पेनल्टी को भी ध्यान में रखें. घर से हर व्यक्ति का भावनात्मक रिश्ता होता है. इसी वजह से ज्यादातर लोग अपना होम लोन जल्द से जल्द चुका देना चाहते हैं. यदि उन्हें कहीं से बड़े अमाउंट में पैसा मिलता है , तो वे अपने लोन्स चुकाने को वरीयता देते हैं. एकमुश्त भुगतान से बैंक को मिलने वाले ब्याज का नुकसान होता है , इसलिए ज्यादातर बैंक इस पर पेनल्टी चार्ज करते हैं. इसे प्री - पेमेंट पेनल्टी कहते हैं. इस उम्मीद के साथ कि इंटरेस्ट रेट्स नहीं बढ़ेंगे , अमूमन लोग फिक्स्ड रेट्स पर ही होम लोन लेना पसंद करते हैं. फिक्स्ड रेट्स आमतौर पर फ्लोटिंग रेट्स से ज्यादा होते हैं. फिक्स्ड रेट पर लोन लेने वाले तमाम लोगों की लोन रेट रिवाइज किए जाने की शिकायत रहती है. इससे कई बार फिक्स्ड रेट फ्लोटिंग रेट के बराबर या ज्यादा हो जाते हैं , इसलिए लोन अग्रीमेंट करते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि बैंक फिक्स्ड रेट को रिवाइज किए जाने जैसी शर्तें तो नहीं रख रहा है. कुछ बैंक लीगल फीस और टेक्निकल फीस जैसे चार्जेज भी कस्टमर पर लगाते हैं. कुछ बैंक रजिस्ट्रेशन फी और स्टाम्प ड्यूटी कस्टमर पर ही चार्ज करती हैं. इनके अलावा मेंटेनेंस , फर्निशिंग और वुड वर्क्स , प्रॉपर्टी टैक्स और असोसिएशन फी आदि ऐसे तमाम खर्चे भी जरूरी हैं , इसलिए अपने बजट को दिमाग में रखकर ही लोन के लिए अप्लाई करें.http://propertysansar.com

Friday, July 2, 2010

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